जय श्री श्याम! हिन्दू धर्म में एकादशी (ग्यारस) का विशेष महत्व है, लेकिन खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए शुक्ल पक्ष की एकादशी किसी बड़े त्योहार से कम नहीं होती। माना जाता है कि इसी पावन दिन पर बाबा श्याम का शीश श्याम कुंड से प्रकट हुआ था। जो भक्त सच्चे मन से खाटू श्याम जी का व्रत (Ekadashi Vrat) करते हैं, उनकी बड़ी से बड़ी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। लेकिन, कोई भी व्रत तभी सफल माना जाता है जब वह पूरे विधि-विधान, नियमों और उद्यापन (Udyapan) के साथ पूर्ण किया जाए। आइए जानते हैं Khatu Shyam Vrat Vidhi, पूजा के नियम और सम्पूर्ण व्रत कथा।
बाबा श्याम का व्रत कब और कैसे शुरू करें? (When to Start)
खाटू श्याम जी का व्रत हमेशा हिन्दू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की एकादशी (ग्यारस) के दिन किया जाता है। कृष्ण पक्ष की एकादशी को यह व्रत नहीं किया जाता।
व्रत शुरू करने के लिए सबसे शुभ महीना फाल्गुन माह (Falgun Month) या कार्तिक माह (देवउठनी एकादशी) को माना जाता है। आप अपनी श्रद्धा अनुसार 11, 21 या आजीवन व्रतों का संकल्प ले सकते हैं। संकल्प हमेशा दाहिने हाथ में जल और अक्षत (चावल) लेकर, बाबा की मूर्ति के सामने लिया जाना चाहिए।
खाटू श्याम जी व्रत के कड़े नियम (Rules of the Fast)
बाबा श्याम का व्रत अत्यंत पवित्रता की मांग करता है। इस व्रत में कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
- दशमी के दिन से ही संयम: ग्यारस (एकादशी) से एक दिन पहले (दशमी की रात) से ही तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा) का पूर्ण त्याग कर देना चाहिए।
- अन्न का त्याग (No Grains): यह पूर्ण रूप से फलाहारी व्रत होता है। इस दिन गेहूं, चावल, दाल और साधारण नमक नहीं खाया जाता।
- क्या खा सकते हैं? आप दूध, दही, फल, मखाने, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक (Rock Salt) का प्रयोग कर सकते हैं।
- ब्रह्मचर्य और क्रोध: व्रत के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें और किसी पर क्रोध न करें। ना ही किसी की चुगली करें। अपना पूरा समय 'ॐ श्री श्याम देवाय नमः' के जाप में व्यतीत करें।
व्रत की पूजा विधि (Puja Process)
एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें।
- अपने घर के मंदिर को साफ करें और एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर खाटू श्याम जी (बर्बरीक) की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- बाबा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं या तस्वीर पर जल के छींटे दें।
- बाबा को लाल गुलाब की माला पहनाएं और उनका प्रिय गुलाब या केवड़े का असली इत्र (Itra) अर्पित करें।
- गाय के घी का दीपक (Akhand Jyot) जलाएं और बाबा को चूरमे, पेड़े या खीर का भोग लगाएं। (ध्यान रहे, बाबा के भोग में तुलसी दल नहीं डाला जाता, क्योंकि वे कृष्ण स्वरूप हैं लेकिन कृष्ण नहीं हैं, वे बर्बरीक हैं।)
- इसके बाद हाथ में पुष्प लेकर नीचे दी गई व्रत कथा का पाठ करें।
श्री खाटू श्याम जी की व्रत कथा (The Vrat Katha)
(कथा को पूर्ण श्रद्धा भाव से पढ़ें या सुनें)
महाभारत के भीषण युद्ध से पूर्व, घटोत्कच और मौरवी के वीर पुत्र 'बर्बरीक' ने अपनी माता को वचन दिया था कि वह युद्ध में उस पक्ष का साथ देंगे, जो हार रहा होगा (हारे का सहारा)। बर्बरीक के पास भगवान शिव द्वारा दिए गए तीन ऐसे चमत्कारिक बाण थे, जो पल भर में तीनों लोकों को जीत सकते थे।
जब बर्बरीक युद्ध भूमि (कुरुक्षेत्र) की ओर जा रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का भेष धारण करके उनका रास्ता रोका। श्रीकृष्ण जानते थे कि यदि बर्बरीक कौरवों की ओर से लड़े (क्योंकि कौरव हार रहे थे), तो पांडवों का विनाश निश्चित है।
श्रीकृष्ण ने बर्बरीक की वीरता की परीक्षा ली और अंत में उनसे दान मांगा। एक क्षत्रिय होने के नाते बर्बरीक ने वचन दे दिया। तब श्रीकृष्ण ने उनसे उनका 'शीश' (सिर) मांग लिया। बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश धड़ से अलग करके भगवान को अर्पण कर दिया।
उनके इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना 'श्याम' नाम दिया और वरदान दिया कि "कलियुग में तुम मेरे नाम से पूजे जाओगे। जो भी भक्त सच्चे मन से तुम्हारी पूजा करेगा और तुम्हारे नाम का व्रत रखेगा, तुम उसके सभी दुखों का नाश करोगे।" इसी वरदान के फलस्वरूप आज घर-घर में खाटू श्याम जी की पूजा होती है।
व्रत का उद्यापन कैसे करें? (Udyapan Vidhi)
जब आपके संकल्पित व्रत (जैसे 11 या 21) पूरे हो जाएं, तो अंतिम व्रत वाले दिन उद्यापन करना अनिवार्य होता है। बिना उद्यापन के व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
- हवन और कीर्तन: उद्यापन वाले दिन घर में बाबा का भव्य कीर्तन (Bhajan) करवाएं और पंडित जी को बुलाकर हवन करवाएं।
- सवामणी (Sawamani): बाबा को सवा किलो या सवा मन (अपनी क्षमता अनुसार) चूरमे का भोग लगाएं।
- ब्राह्मण और कन्या भोजन: हवन के पश्चात 5 या 11 ब्राह्मणों को और कन्याओं को घर बुलाकर आदर सहित सात्विक भोजन कराएं।
- दान-दक्षिणा: भोजन के बाद ब्राह्मणों को सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा, वस्त्र और बर्तन दान करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।
- क्षमा याचना: अंत में बाबा श्याम से व्रत के दौरान हुई किसी भी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।
।। बोलिए खाटू नरेश की जय ।।
।। हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा ।।